Tuesday, April 20, 2010

पैसा कमाने के तरीके

वैसे देखा जाए तो अपने देश में पैसा कमाने के मुख्यत: दो ही ऐसे तरीके हैं, जो डंके की चोट पर लक्ष्मी को घर आने की गारंटी देते हैं - पहला टाटा स्टाइल, दूसरा अंबानी स्टाइल! ऐसे में थरूर स्टाइल को आप हिडन स्टाइल की कैटिगरी में रख सकते हैं।

टाटा स्टाइल में आप पैसे से पैसा तो कमा सकते हैं, लेकिन 2 को 4 ही कर सकते हैं। अगर आपको अपना पैसा 2 से 10 करना है और वह भी फटाफट, तो आपको अंबानी स्टाइल में काम करना होगा। पहले स्टाइल में पैसा कमाना जरूरी तो होता है, लेकिन थोड़ी ईमानदारी के साथ। अब तक टाटा का नाम सिर्फ माओवादियों को लेवी देने के लिए खराब हुआ है। जबकि दूसरे स्टाइल की खासियत यह है कि बस पैसा आना चाहिए। कैसे आ रहा है, यह नहीं देखा जाता! इस थ्योरी में माना जाता है कि पैसा कमाने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को पैसे से ही साफ किया जा सकता है और ऐसा करने में कोई बुराई भी नहीं है। शायद यही वजह है कि टाटा आज भी टाटा ही हैं, जबकि अंबानी दुनिया के धन्ना सेठों की लिस्ट में बिल गेट्स को टक्कर देते हैं।


जाहिर है, पैसा पीटने के अंबानी स्टाइल को देखकर ही अपने नेताओं ने 'थरूर स्टाइल' इन्वेंट किया होगा या यह फिर यह भी संभव है कि थरूर स्टाइल को देखकर ही अंबानी स्टाइल अस्तित्व में आया हो। यह अनुसंधान का विषय है। कोई चाहे तो इस पर पीएचडी कर सकता है।


यह अब कोई राज़ की बात नहीं है कि देश के तमाम विकास परियोजनाओं ने सबसे ज्यादा विकास नेताओं का किया है और इसमें उनके परिवार और महिला- पुरुष मित्रों ने अहम भूमिका निभाई है। दिल्ली को ही लीजिए। ब्लूलाइन बस से लेकर ऑटो तक और जल बोर्ड के पानी टैंकरों से लेकर प्रॉपर्टी के बिजनेस तक, नेताओं के सगे-संबंधियों की ही तूती बोलती है, नेताजी कहीं नहीं होते। वे होते हैं, तो बस पर्दे के पीछे।

जैसे मोदी चाहकर भी थरूर की वजह से कोच्चि को फ्रैंचाइजी लेने से नहीं रोक पाए, उसी तरह दुनिया की कोई भी ताकत नेताओं के सगे-संबंधियों के किसी भी काम को रोकने का साहस नहीं कर पाती, चाहे वह कितना भी गलत या अनैतिक क्यों न हो! ऐसे में पैसा 200 क्या, 1000 गुना सलाना भी बढ़ सकता है। वैसे, इसमें 'मोदियों' का भी दोष कम नहीं होता, क्योंकि रेवड़ी में हिस्सेदारी उन्होंने भी उड़ाई होती है। दुर्भाग्य से कमाई का चौथा स्टाइल मोदियों वाला ही है और देश को खोखला करने वाला सबसे बड़ा घुन यही है।

तो अपने देश में ये ही चार तरीके हैं लक्ष्मीपति बनने के। अब यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वह इनमें से किस स्कूल को फॉलो करता है! आपकी मर्जी, आपका पैसा!